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सोचें और विचारों की सार्थकता बरकरार रखें

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आदमी की सोच तो हवा है जो हर समय हर जगह विद्यमान है, पर हवाएं भी तरह-तरह की होती हैं, विज्ञान ने तो उसे कितनी श्रेणियों में बांटा है, ऑक्सीजन जो प्राणदायी है, नाइट्रोजन जो प्राणों को हरने वाली है फिर हाइड्रोजन, हिलियन और न जाने क्या-क्या? अब तो रासायनिक युग है न जाने कितनी प्रकार की वायुओं का निर्माण होता है, हवा का तो वजन भी होता है पर सोच का वजन नहीं होता, पर दुनिया भर के वजनों पर नियंत्रण करता है, बातें करते वक्त लोग कह देते हैं कि आपकी बातों में वजन है, वजनी बातें किया करो, हल्की-फुल्की नहीं, सोच तो खुले हुए नल के समान है जिसमें से पानी बहते ही रहता है, कितना सोचता है आदमी और कितना कर पाता है उसमें जमीन-आसमान का अंतर है, जितना सोचता है उतना कर नहीं पाता या हो नहीं पाता, आदमी की सामथ्र्य ही कितनी है, सोचने में कुछ खर्च नहीं है करने में है और वह निर्भर करता है कि आप क्या करना चाहते हैं, कितना करना चाहते हैं, बस यही उचित है कि ज्यादा सोचें ना, आखिर विचार शक्ति भी शक्ति है और इसे बर्बाद नहीं होने देना चाहिए, पर कुछ भी करने से पहले सोचना जरूर चाहिए नहीं तो वही बात होगी कि बिना बिचारे जो करे सो पाछे पछताय, काम बिगारे आपनो जग में होत हंसाय, पूरी दुनिया विचारों से भरी हुई है, क्योंकि विचार दिखते नहीं पर नष्ट भी नहीं होते। असंख्य विचार ब्रह्मांड में मंडरा रहे हैं, उन्हें हम आकर्षित भी करते हैं, कहा भी है कि समाज विचार एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं, यह विचारों का अपना विज्ञान है, कितने विचार ब्रह्मांड में चले जाते हैं, अच्छे और बुरे भी क्योंकि नष्ट नहीं होते, विचार निर्माण एक अति सूक्ष्म प्रक्रिया है, इतनी सूक्ष्म कि उसे देखा नहीं जा सकता, बस मन में विचार उठा तो पता लगता है कि हमने यह सोचा, लगता है आदम युग से लेकर आज तक जितने भी विचार बने हैं, वे विद्यमान हैं और अपना प्रभाव डाल रहे हैं विशेषकर मनुष्य जाति पर, इसीलिए तो आदमी कभी-कभी हैवानियत की हदें पार कर देता है, विचारों पर जितना विचार करें कम है, हर आदमी यदि अपने विचारों को सम्हाले, ध्यान दे सकारात्मकता प्रदान करे तो यह दुनिया कहां से कहां पहुंच जाए, पर ऐसा हो नहीं पाता, तो आइए, कम से कम सोचें और विचारों की सार्थकता बरकरार रखें, बस यही संदेश है|

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