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देश के अदालतों में जजों की घोर कमी

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नई दिल्ली : देशभर के हाईकोर्ट जजों की कमी से जूझ रहे हैं, इन अदालतों में करीब 44 फीसदी जजों के पद खाली हैं, 24 हाईकोर्ट के न्यायाधीश के लिए स्वीकृत 1056 में से 465 पद खाली हैं, इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में भी स्वीकृत 31 पदों में से छह पद पर न्यायाधीश नहीं है, यह जानकारी विधि और न्याय मंत्रालय ने दिल्ली निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट हरपाल सिंह राणा को आरटीआई एक्ट के अंतर्गत दी है, मंत्रालय ने 1 मार्च, 2016 तक जजों की संख्या का ब्यौरा दिया है.

आरटीआई के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों की संख्या सबसे कम है, यहां स्वीकृत पद 160 हैं जबकि यहां कार्यरत न्यायाधीश सिर्फ 72 हैं और 88 पद खाली हैं, यानी यहां करीब 55 फीसदी न्यायाधीशों की कमी है, वहीं दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के स्वीकृत 60 पदों में 21 खाली, हिमाचल में स्वीकृत 13 में से 6 पद, जम्मू और कश्मीर में स्वीकृत 17 में से 08 पद, पंजाब और हरियाणा में स्वीकृत 85 में से 37 पद, उत्तराखंड में हाईकोर्ट में स्वीकृत 11 में से 05 न्यायाधीश के पद खाली हैं.

इसके अलावा त्रिपुरा इकलौता ऐसा प्रदेश है जहां हाईकोर्ट में जजों के सभी पद भरे हुए हैं, यहां 4 पद स्वीकृत हैं, वहीं सिक्किम और मणिपुर में एक-एक, मेघालय में दो और केरल में तीन जजों के पद खाली हैं, हरपाल राणा का कहना है कि अगर जल्द ही जजों के खाली पदों को नहीं भरा गया तो इनकी संख्या 500 पार कर जाएगी|

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