Advertisement

जी-7 शिखर सम्मेलन में पश्चिमी देशों से चीन के ख़िलाफ़ एकजुट होने की अपील करेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन

0

लंदन। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान पश्चिमी देशों से चीन के ख़िलाफ़ एकजुट होने की अपील करेंगे.
ब्रिटेन में बैठक के दौरान राष्ट्रपति बाइडन विकासशील देशों में चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की प्रतिस्पर्धा में नया गठबंधन बनाने का आह्वान कर सकते हैं.
अमेरिका और उसके सहयोगी देश चीन पर शिनजियांग प्रांत में मानवाधिकार उल्लंघन और जबरिया श्रम कराने के आरोप भी लगाते रहे हैं.
जी-7 देशों के नेता फविष्य में महामारी की रोकथान के लिए योजना के प्रति प्रतिबद्धता भी ज़ाहिर करेंगे.
ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन कोर्नवॉल के तटीय रिज़ॉर्ट कार्बिस बे में इस तीन दिवसीय सम्मेलन की मेज़बानी कर रहे हैं.
बीबीसी के नॉर्थ अमेरिका एडिटर जॉन सोपेल के मुताबिक अमेरिकी शनिवार के सत्र को दुनियाभर में चीन के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देने के रूप में देख रहे हैं.
पश्चिमी देशों को लगता है कि चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को चुनौती दी जानी चाहिए. अपने इस अभियान के तहत चीन ने विकासशील देशों में अरबों डॉलर निवेश किए हैं.
अमेरिकी प्रशासन के शीर्ष अधिकारी ये साबित करना चाहते हैं कि पश्चिमी मूल्य बरकरार रहेंगे. उनका तर्क है कि चीन के निवेश की भारी क़ीमत है.
पश्चिमी देशों का मानना है कि शिनजियांग के लेबर कैंपों में वीगर मुसलमानों से ज़बरदस्ती काम करवाना नैतिक तौर पर ग़लत है और आर्थिक रूप से अस्वीकार्य है क्योंकि इससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का चुनौती मिलती है.
जो बाइडन इस बात पर ज़ोर दे सकते हैं कि वैश्विक सप्लाई चैन में इस तरह के श्रम से बनाए गए उत्पाद नहीं होने चाहिए. बाइडन इसका विकल्प भी पेश कर सकते हैं.
बाइडन प्रशासन ने अभी ये नहीं बताया है कि इस वैश्विक प्रयास में पश्चिमी देशों की कितनी हिस्सेदारी होगी और ये कब शुरू होगा या पूरा होगा.
हालांकि ये स्पष्ट है कि पश्चिमी देश निरंतर ताक़तवर हो रहे चीन का मुक़ाबला करना चाहते हैं.
पश्चिमी देशों ने चीन के ख़िलाफ़ अब तक क्या किया है?
इसी साल अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और कनाडा ने चीन के ख़िलाफ़ कई तरह के प्रतिबंधों की घोषणा की थी.
प्रतिबंधों के तहत शिनजियांग प्रांत के कई शीर्ष अधिकारियों पर यात्रा प्रतिबंध लगाए गए थे और उनकी संपत्ति ज़ब्त की गई थी.
एक अनुमान के मुताबिक चीन के उत्तरी-पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में 10 लाख से अधिक वीगर मुसलमान अवैध हिरासत में हैं.
चीन का तर्क है कि इन्हें पुनर्शिक्षा केंद्रों में रखा गया है. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अल्पसंख्यक मुसलमानों को प्रताड़ित किया जा रहा है.
चीन की सरकार पर वीगर महिलाओं की ज़बरदस्ती नसबंदी करने के आरोप भी लगे हैं. बच्चों को परिवारों से अलग किया जा रहा है.
इसी साल फरवरी में बीबीसी ने अपनी एक जांच रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें वीगर मुसलमानों के उत्पीड़न की कहानियां सामने आईं थीं.
हिरासत में ली गईं महिलाओं के व्यवस्थित बलात्कार और यौन उत्पीड़न की जानकारियां भी सामने आईं थीं.
पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के जवाब में चीन ने अपनी तरफ़ से प्रतिबंध लगा दिए थे.
-BBC

Share.

About Author

Leave A Reply

Translate »
error: Content is protected !!